मोतीलाल नेहरू की ओर से
आरा,
29 फरवरी 1920
मेरे प्यारे जवाहर,
हरकिशन आज सवेरे आये हैं और 8 बजे रात की पैसिंजर से इलहाबाद जा रहे हैं | तुम्हारा तार अभी मिला है, जिसमे तुमने लिखा है कि इंदिरा ठीक है और तुम कल सवेरे बम्बई जा रहे हो | मैंने तुम्हे तार दे दिया है कि हरकिशन कल सवेरे पहुंच रहे हैं और कुछ घंटे ठहरेंगे | वह एक्सप्रेस से दिल्ली चले जाएंगे | उन्ही के हाथ यह चिट्ठी भेज रहा हूं |
नाश्ते के वक़्त पंजाब के मामलो और आमतौर से राजनैतिक हालत पर हरकिशनलाल, दास और मेरी देर तक बातचीत हुई है | हरकिशनलाल तुम्हें बतायेंगे कि हम किस नतीजे पर पहुंचे हैं | उन्हें ‘इंडिपेंडेंट’ का दफ़्तर घुमाकर दिखा देना और वहाँ जो अव्यवस्था फैली हुई है, उसके बारे में उन्हें खुद राय बना लेने देना | उन्होंने लाहौर पहुँचते ही हमारे लिए आदमी भेजने का वादा किया है |
मालूम नहीं, तुम बम्बई कितने दिन ठहरोगे | मैं चाहूंगा कि जितनी जल्दी हो सके, लौट आओ | बम्बई वाले मुक़दमे के मुद्दई को ब्यौरा भेजने के बारे में तुमने कुछ किया ? अगर न किया हो तो खुद देखकर यह काम करा देना |
राजनीति में उनकी अपनी हालत क्या है इसके बारे में गांधीजी एक महत्व का बयान देने जा रहे हैं | इस बारे में मैं तुम्हें पहले ही लिख चूका हूं | मैंने जो कुछ कहा है, दास उससे सहमत है | और बातों के साथ इस मामले में भी आज सवेरे हमारी बातें हुई | यह करीब-करीब साफ है कि गांधीजी जो रुख लेने जा रहे हैं, वह कांग्रेस की तजवीजो से पूरी तरह मेल नहीं खता | हमारी सिर्फ यह शिकायत है कि उन्होंने जहाँ शास्त्री और मालवीय को अपने विश्वास में लिया, हम लोगों को बिल्कुल अलग छोड़ दिया | फिर भी हमें देखना है कि आगे नई क्या बात आती है | इसके बाद हमारे तय करने का समय आएगा कि हम उसपर चले या नहीं | जब इस मसले पर मैंने तुम्हे पिछली बार लिखा था, तब मैं इसी नतीजे पर पहुंचा था | मैंने आज सवेरे दास से यही बात कही | और वह मुझसे सहमत हुए, लेकिन उन्होंने ख़ासतौर से कहा कि मैं तुम्हें यह बता दूं कि शिकयात वाली बात उनकी उठाई हुई नहीं हैं, बल्कि उन्होंने वह मुझसे ली है | वह समझते हैं कि उनके पीठ-पीछे गांधीजी से उनकी बुराई की जा रही है, और इसीलिए वह चाहते हैं कि मैं ख़ासतौर पर इसका ज़िक्र कर दूं |
तुम्हारा स्नेही,
पिता
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