सरोजिनी नायडू की ओर से
(यह पत्र मेरी बेटी इंदिरा
(अब इंदिरा गांधी) के जन्म पर लिखा गया था)
मद्रास
17 दिसम्बर 1917
प्रिय जवाहर,
तुम्हारी खुशखबरी सुनने के बाद से मुझे पलभर भी समय नहीं मिला कि बैठकर तुम्हें या कमला को बधाई या नई भतीजी को आशीर्वाद
भेजती | आज भी मैं हमेशा की तरह कामकाजभरे दिन में से आधा सेकंड निकालकर ये दोनों
काम करने बैठी हूँ | मद्रास पागल हो उठा है-एकदम पागल ! और मुझे भी पागल कर देने
पर उतारू है !
अगर तुम कलकत्ता आओ तो मैं 7 हंगरफोर्ड स्ट्रीट
पर मिलूंगी, इसलिए मिलना न भूलना | मैं तुम्हें ‘भारत की आत्मा’ की एक प्रति भेज
रही हूं, जो मांटेग्यू द्वारा की गई बमबारी का मेरा जवाब है |
सबको स्नेह और भारत की नई आत्मा को प्यार |
सस्नेह तुम्हारी,
सरोजिनी नायडू
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